फिल्म जगत के प्रख्यात अशफ़ाक खोपेकर को मिला महाराष्ट्र के राज्यपाल सी.पी. राधाकृष्णन के हाथों ‘बेस्ट बॉलीवुड एक्टिविस्ट’ का प्रतिष्ठित सम्मान
मुंबई:भारतीय फिल्म उद्योग के जाने-माने लेखक, निर्देशक और प्रख्यात सामाजिक कार्यकर्ता अशफ़ाक खोपेकर को सिनेमा जगत और समाज सेवा में उनके अद्वितीय योगदान के लिए महाराष्ट्र के माननीय राज्यपाल सी.पी. राधाकृष्णन के हाथों प्रतिष्ठित “भारत रत्न डॉ. बाबासाहेब अंबेडकर अवार्ड्स 2024” के अंतर्गत ‘बेस्ट बॉलीवुड एक्टिविस्ट’ (Best Bollywood Activist) के पुरस्कार से सम्मानित किया गया है।पिछले 33 वर्षों (साल 1993) से मनोरंजन उद्योग में सक्रिय अशफ़ाक खोपेकर ने अपना पूरा जीवन पर्दे के पीछे काम करने वाले कामगारों, तकनीशियनों के अधिकारों की रक्षा और समाज के वंचित वर्ग के उत्थान के लिए समर्पित कर दिया है।
राज्यपाल महोदय द्वारा मिला यह सम्मान उनके इसी निस्वार्थ संघर्ष पर एक बड़ी मुहर है।सिनेमा जगत के अधिकारों की बुलंद आवाजअशफ़ाक खोपेकर फिल्म उद्योग की अग्रणी संस्थाओं जैसे IMPA, MCAI, SWA और IFTDA के सम्मानित सदस्य हैं। वे FWICE (Federation of Western India Cine Employees) के सक्रिय सदस्य और सलाहकार भी हैं।विवादों का शांतिपूर्ण समाधान: साल 2010 से 2012 तक IFTDA की डिस्प्यूट सेटलमेंट कमेटी के चेयरमैन के रूप में उन्होंने सैकड़ों सदस्यों के विवादों को सुलझाकर उन्हें न्याय दिलाया।संगठनों का नेतृत्व: वर्तमान में वे ‘स्क्रीनराइटर गिल्ड ऑफ इंडिया’ और ‘दादासाहेब फाल्के फिल्म फाउंडेशन’ के अध्यक्ष (President) के रूप में अपनी सेवाएं दे रहे हैं।
IPRS में सुधार की लड़ाई: IPRS (Indian Performing Right Society) के सदस्यों पर हो रहे अत्याचारों और रॉयल्टी वितरण में धांधली के खिलाफ उन्होंने अपने व्यक्तिगत खर्च पर बड़ा आंदोलन खड़ा किया, जिसके कारण कमेटी के सदस्यों में ऐतिहासिक बदलाव आया। यह संघर्ष आज भी जारी है।बिना किसी डोनेशन के 15 सालों से सम्मान और सेवा’दादासाहेब फाल्के फिल्म फाउंडेशन’ के बैनर तले अश्फ़ाक खोपेकर पिछले 15 वर्षों से हर साल फिल्म जगत के उन तकनीशियनों को सम्मानित कर रहे हैं, जो पर्दे के पीछे रहकर पूरी फिल्म बनाते हैं। बिना किसी बाहरी डोनेशन या चंदे के, वे हर साल इन तकनीशियनों को ट्रॉफी और ₹11,000 की सम्मान राशि भेंट करते हैं। इसके अलावा, इसी फाउंडेशन के तहत उन्होंने फिल्म जगत के लोगों के लिए 3 साल तक मुफ्त मेडिकल सेंटर चलाकर हजारों लोगों की सेवा की।धार्मिक एकता और सामाजिक सद्भाव की मिसाल खोपेकर जी का सामाजिक जीवन मुंबई में सांप्रदायिक सौहार्द और धर्मनिरपेक्षता की एक अनोखी मिसाल है:ओमकारेश्वर साईं मंदिर की स्थापना: ‘खोपेकर एजुकेशन एंड वेलफेयर ट्रस्ट’ के तहत उन्होंने दहिसर ईस्ट में अपनी खुद की जमीन पर और अपने निजी खर्च से 3000 वर्ग फुट के ‘ओमकारेश्वर साईं मंदिर’ की स्थापना की। पिछले 25 वर्षों से यहां महाशिवरात्रि उत्सव, साईं भंडारा और सांस्कृतिक कार्यक्रमों का भव्य आयोजन वे खुद करते आ रहे हैं।
अनाथ बच्चों की शिक्षा: बोरीवली वेस्ट की आई.सी. कॉलोनी में स्थित ‘मदरसा जामियातुल अजहर’ के माध्यम से वे 40 से 50 अनाथ बच्चों की मुफ्त शिक्षा, भोजन और रहने (आजीविका) का पूरा प्रबंध कर रहे हैं।
मस्जिद का शांतिपूर्ण संचालन: ‘जामातुल मुस्लिमीन’ के अंतर्गत पिछले 13 वर्षों से वे मस्जिद के संचालक (gen.secretory) के रूप में कार्य कर रहे हैं। उन्होंने बिना किसी विवाद या फसाद के हमेशा शांतिपूर्वक और भाईचारे के साथ सारा काम संभाला है।
बहुमुखी प्रतिभा के धनवान: लेखक और निर्देशक एक कड़े संघर्षकर्ता होने के साथ-साथ अशफ़ाक खोपेकर मूल रूप से एक संवेदनशील लेखक और निर्देशक (Writer/Director) हैं। उनकी कई फिल्में, शॉर्ट फिल्में और म्यूजिक एल्बम्स आज भी इंटरनेट पर दर्शकों के लिए उपलब्ध हैं। उनकी प्रसिद्ध कविता पुस्तक ‘सच्चाई’ (Sachchayee) प्रकाशित होकर सराहना बटोर चुकी है, और इसके अगले 4 भाग (Parts) वर्तमान में प्रकाशन की प्रक्रिया में हैं।१५० से ज्यादा गीत, ग़ज़ल, कव्वाली और भजन से संगीत प्रेमी को खुश किया है।अशफ़ाक खोपेकर आज भी एसोसिएशन की बेहतरी और समाज के दबे-कुचले लोगों पर होने वाले अत्याचार के खिलाफ अपनी कानूनी और नैतिक लड़ाई पूरी ताकत से लड़ रहे हैं।—
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